मामला पटना में चल रहे बुलडोज़र एक्शन से जुड़ा है, जहाँ बिना पूरी कानूनी प्रक्रिया अपनाए किए गए ध्वस्तीकरण पर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया। सुनवाई के दौरान जज साहब ने साफ शब्दों में कहा कि “कानून से ऊपर कोई नहीं है, चाहे वह प्रशासन ही क्यों न हो।”

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि किसी भी नागरिक की संपत्ति को गिराने से पहले नोटिस, सुनवाई और जवाब का अवसर देना अनिवार्य है। यदि ऐसा नहीं किया गया, तो यह सीधे तौर पर संविधान और कानून का उल्लंघन माना जाएगा।
कोर्ट ने प्रशासन से पूछा कि
- क्या प्रभावित लोगों को पहले नोटिस दिया गया?
- क्या उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका मिला?
- और किस कानून के तहत यह बुलडोज़र कार्रवाई की गई?
इन सवालों पर प्रशासन की ओर से संतोषजनक जवाब न मिलने पर अदालत ने नाराज़गी जाहिर की।
हाईकोर्ट की सख्ती के बाद अब माना जा रहा है कि बुलडोज़र एक्शन पर प्रशासन को जवाब देना पड़ सकता है और आगे की कार्रवाई पर भी रोक लग सकती है। कोर्ट ने संकेत दिए हैं कि अगर नियमों की अनदेखी हुई, तो जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई हो सकती है।
यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि
क्या बुलडोज़र एक्शन कानून के दायरे में हो रहा है या फिर अधिकारों का हनन किया जा रहा है?
फिलहाल, पटना हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद पूरे प्रशासन में हलचल तेज़ है। अब सभी की निगाहें अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहाँ इस मामले पर बड़ा फैसला आ सकता है।






